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हमें तो स्टार चाहीए, सेहत जाए भाड़ में



मैगी की मिलावट के मुद्दे ने यह चर्चा छेड़ दी है कि ब्रांडेड उत्पाद सभी नियम कानूनों को धत्ता बता कर मनमानी करते फिरते हैं और लोगों की सेहत की एेवज में मोटा माल कमा रहे हैं। इसके साथ ही मैगी के स्टार प्रचारकों को भी कटघरे में खड़ा किए जाने को लेकर चर्चा छिड़ गई है, जाे इस मोटे माल में 'हिस्सेदार' हैं। कुछ प्रचारकों के हक में हैं तो कुछ उनको सज़ा दिलाने के हक में। कुछ यह भी मान रहें हैं कि हाे-हल्ला सितारों तक सिमट के रह जाएगा और असली मुद्दा खो जाएगा।
maggi padegi mehangi/मैगी पड़ेगी महंगी

इस बात पर भी माथा खुरचा जा रहा है कि अाखिर अचानक मैगी पर ताबड़ताेड़ छापेमारी हाेने की वजह क्या है, इसके पीछे की राजनीति क्या है? बाकी नूड्लस उत्पाद और अन्य पैकेजड खाद्य उत्पाद कब इस जांच के घेरे में अाएंगे? अाएंगे भी या नहीं? सवाल बहुत से हैं। लेकिन एक अहम सवाल जो सितारों की नैतिकता से जुड़ा है और हम सब भुक्तभोगियों की भी नैतिकता से जुड़ा है, बड़े बड़े सवालों की भीड़ में यह मामलूी सा सवाल कहीं खो कर ना रह जाए सो उसे छूने की कोशिश कर रहा हूं।

मुझे दूसरों का पता नहीं, पर मैं यह जानता हूं अनैतिकता को अनैतिकता कहना मेरी ज़िम्मेदारी है। हम सब की है। मैगी की नैतिक जिम्मेदारी सबसे बड़ी है, जिसने मुनाफे के लालच में लोगों की सेहत और ज़िंदगी से खिलवाड़ किया है। उन लोगों की भी है, जिन्होंने पैसे के लालच और अपनी इमेज को कैश करके मुंह मांगे दाम कमाए हैं। लोगों की भी नैतिक जिम्मेदारी है कि कोई चीज़ खाने और ख़रीदने से पहले वह पता करें कि उसमें क्या है। भारत जैसे अनपढ़ देश में यह श्रद्धा की चर्म सीमा ही है कि हमारे यहां लोगों को 'स्वाद भी सेहत भी' कहना काफी है किसी उत्पाद को बेचने के लिए।

बात केवल सेलीब्रेटीज़ से ना शुरू हुई थी ना उन पर ही खत्म होगी। सेलीब्रेटीज़ की बात कर ही कौन रहा है, सिर्फ उनके फैन्स वर्ना कानून तों उनको क्राइम में पार्टी की ही तरह डील कर रहा है, साेशल मीडिया पर लोग क्याें हाे हल्ला मचा रहे हैं। हर सेलीब्रिटी ने एेड् से करोड़ों रूपए कमाएं हैं, अपने बचाव के लिए उनके पास वकील हैं, उनका खरीदा हुअा मीडिया है। सबसे बड़ी समस्या उनके भ्रमित और मोहित फैन्स हैं, जो बिना चीज़ों को गहराई से जाने बस अन्ध भक्ति में उनका पक्ष लेने लग जाते हैं।


सलमान ख़ान के मामले में क्या हुअा, पहले तो फैन्स उसकी सज़ा पर राेने लगे, प्रथार्नाएं करने लगे। लेकिन अगले ही दिन उसने पैसे और पहुंच के दम पर कानून काे 'कोठे' की चीज़ बना डाला। तब क्यों नहीं राेया कोई। कानून की माैत पर रोना क्यों नहीं अाया किसी को। जब कोई मुहल्ले का गुंडा किसी की बहन बेटी को परेशान करेगा और थाने में आपकी बात नहीं सुनी जाएगी, तब सलमान खान अाएगा दराेगा को अापके हक में करने के लिए। आप खुद ही एक स्टार की भक्ति में पैसे के सामने कानून को छोटा होते देख कर खुश हो रहे हैं। कल को जब आपके पास कानून खरीदने के लिए पैसा नहीं होगा तब आप ही कहेंगे कि कानून सिर्फ पैसे वालों का है। फिर आप भी कानून को खरीदने के लिए अंधाधुंध पैसा कमाने लग जाएंगे बजाए यह सोचे कि अगर कानून सब के लिए बराबर हो जाए तो पैसे की ज़रूरत ही खत्म हो जाएगी। जितना हल्ला उसको सज़ा मिलने पर मचा, अगर उतना उसकी ज़मानत होने पर मचा होता तो अाज उसकी नियति भी कुछ और होती और लोंगों का भी कानून में विश्र्वास बढ़ता, लेकिन हमें क्या हमें क्या हमें तो स्टार चाहीए, कानून जाए भाड़ में। हमें तो मैगी चाहिए, सेहत जाए भाड़ में।

यह सेलीब्रिटी भी इंसान ही होते हैं और हम सभी की तरह गल्तियां करते हैं, बल्कि पैसे के लालच और शाेहरत के दंभ में हमसे ज़्यादा करते हैं।


अगर आप को लग रहा है कि इस हो हल्ले में बाकी उत्पाद बच जाएंगे तो अभी से आप उनको खरीदना बंद करीए। कोई इसका कारण पूछे तों उन्हें असलियत बताईए। जब कंपनियों का माल गोदामों में सड़ेगा तो अपने आप हो-हल्ला मचेगा उनके बारे में भी। नैतिक जिम्मेदारी सभी की है, सितारों की सबसे ज़्यादा है। जिनको वह अपनी फिल्मों के टिकट बेच कर सितारा बनते हैं कम से कम उनकी सेहत से खिलवाड़ करने में मुनाफाख़ाेर कंपिनयों का साथ देना और यह जानते हुए भी की उनके देश की जनता भोली है, उन्हें बेवकूफ बनाना उनको कभी तो इसके लिए दंड भुगतना होगा।

लेकिन आप दंड क्यों भुगतते हैं, देख कर खाईए क्या खा रहे हैं। खाकर देखते रहेंगे तो देखने लायक नहीं रहेंगे।

-दीप जगदीप सिंह